नया सवेरा, नई उम्मीद – कविता
सारे खेल आज ख़त्म हुए,जा बैठा राजू टक टकी लगाए,गली के किनारे, अपने बाबा के,इंतजार में दूर दूर तक निगाहें टिकाए। बाबा के इंतज़ार में अब भूख़ का है ज़ोर।क्या…
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December 31, 2023
सारे खेल आज ख़त्म हुए,जा बैठा राजू टक टकी लगाए,गली के किनारे, अपने बाबा के,इंतजार में दूर दूर तक निगाहें टिकाए। बाबा के इंतज़ार में अब भूख़ का है ज़ोर।क्या…
किरण भागता-भागता घर आया और अपनी माँ की ओर आश्रय से देखने लगा, जैसे कुछ बताना चाहता हो। "क्या हुआ मेरे राजा बेटे को", पूछती हुई सुनीता आटा लगाने लगी…
सरल व्यक्तित्व, सादा जीवन, कठिन परिश्रमी और शान्ति के दूत; जी हां यह कोई और नहीं बल्कि हमारे अपने गांधी जी और लाल बहादुर शास्त्री जी हैं जिनकी विचारधारा आज…
अभिव्यक्ति का परचम हिन्दी, संस्कृति की जननी हिन्दी, निश्चल और निराली हिन्दी, अंतर्मन की तस्वीर हिन्दी | अपनी भाषा करो अपनी भाषा पर प्यार।जिसके बिना मूक रहते तुम,रुकते सब व्यवहार।…